Written by , (शिक्षा- एमए इन जर्नलिज्म मीडिया कम्युनिकेशन)

भारत में अधिकतर लोग अपने दिन की शुरुआत चाय के कप से ही करते हैं। हालांकि, ये बात तो सामान्य दिनों की है, लेकिन जब बात गर्भावस्था की हो तो चाय सुरक्षित है या नहीं, इसकी दुविधा हो सकती है। कई महिलाओं के मन में इसे लेकर संशय बना रहता है। यही कारण है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको प्रेगनेंसी में चाय का सेवन करना चाहिए या नहीं, इस बारे में जानकारी दे रहे हैं। साथ ही लेख में आप प्रेगनेंसी में चाय पीने के फायदे, नुकसान और इसकी मात्रा के बारे में भी जानेंगे। उम्मीद करते हैं कि लेख को अंत तक पढ़ने के बाद प्रेगनेंसी में चाय पीने से जुड़ी आपकी सभी दुविधाएं दूर हो जाएगी। तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

शुरू करते हैं

सबसे पहले जानते हैं कि प्रेगनेंसी में चाय का सेवन चाहिए या नहीं।

क्या गर्भावस्था में चाय पीना सुरक्षित है? – Is it Safe to Drinking Tea While Pregnant?

अगर सीमित मात्रा में कभी-कभी चाय का सेवन किया जाए, तो प्रेगनेंसी में चाय पीना सुरक्षित हो सकता है। इसका उल्लेख चीन में गर्भवती महिलाओं पर किए गए एक शोध में मिलता है (1)। साथ ही यह भी बता दें कि चाय में कैटेचिन (Catechins) और फेनोलिक (Phenolic) नामक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो ओवेरियन और एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदरूनी परत पर होने वाला कैंसर) कैंसर के साथ ही टाइप-2 डायबिटीज के उपचार में मदद कर सकते हैं। हालांकि, चाय में कैफीन मौजूद होता है, जिस वजह से सीमित मात्रा में इसे लेने की सलाह दी जाती है (2)।

गर्भावस्था में दिनभर में एक से दो छोटे कप चाय का सेवन सुरक्षित माना जा सकता है (3)। ऐसे में इन अध्ययनों के आधार पर देखा जाए, तो गर्भवती महिला के लिए सीमित मात्रा में चाय का सेवन करना सुरक्षित व फायदेमंद माना जा सकता है। हालांकि हर किसी की गर्भावस्था अलग-अलग होती है। इसलिए बेहतर होगा कि गर्भवती चाय का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श भी लें।

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चलिए अब जानते हैं कि प्रेगनेंसी में कौन सी चाय सुरक्षित हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान कौन-सी चाय सुरक्षित है?

चाय की विभिन्न वैरायटी होती है, जिनमें से हर्बल चाय पीना प्रेगनेंसी के दौरान सुरक्षित माना जा सकता है। एनीसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार रसभरी, पेपरमिंट (पुदीना), अदरक, कैमोमाइल और ग्रीन टी पीना सुरक्षित हो सकता है (4)। हालांकि, हर्बल चाय में भी कैफीन होता है, लेकिन इसकी मात्रा काफी कम होती है। जिस वजह से इसके दुष्प्रभाव होने के जोखिम कम हो सकते हैं (5)। इस आधार पर गर्भावस्था के दौरान विभिन्न हर्बल चाय पीना न सिर्फ सुरक्षित माना जा सकता है, बल्कि इसके स्वास्थ्य फायदे भी हो सकते हैं, जो हम आगे बता रहे हैं।

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आगे पढ़ें प्रेगनेंसी में चाय पीने के फायदे क्या हैं।

प्रेगनेंसी में चाय पीने के फायदे – Benefits of Drinking Tea During Pregnancy In Hindi

हम यहां प्रेगनेंसी में चाय पीने के फायदे क्रमवार तरीके से बता रहे हैं, जो गर्भावस्था के दौरान होने वाली विभिन्न समस्याओं को कम करने में कुछ हद तक प्रभावकारी हो सकते हैं। ध्यान रखें कि इनकी मात्रा और पीने के समय के बारे में डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

1. मॉर्निंग सिकनेस दूर करे

लगभग दो-तिहाई गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के पहले चरण में मॉर्निंग सिकनेस का अनुभव करती हैं। इस दौरान उनमें मतली और उल्टी के लक्षण देखे जा सकते हैं। इसके लक्षण दिन के समय में सबसे ज्यादा होते हैं, जिस वजह से इसे मॉर्निंग सिकनेस कहा जाता है (6)। वहीं, इस समस्या से राहत पाने के लिए गर्भवती महिलाएं अदरक से बनी हर्बल चाय का सेवन कर सकती हैं। अध्ययन के अनुसार अदरक में विटामिन बी6 होने के साथ-साथ एंटीएमेटिक (Antiemetic – मतली रोकने वाला) प्रभाव भी होता है। यही कारण है कि गर्भावस्था में अदरक की चाय पीने से गर्भवती महिलाएं मॉर्निंग सिकनेस और हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis gravidarum- प्रेगनेंसी में अत्यधिक उल्टी होना) जैसी समस्याओं से राहत पा सकती हैं (4)। हालांकि, अगर समस्या ज्यादा हो तो अदरक की चाय पर निर्भर न करते हुए डॉक्टरी इलाज का विकल्प लें।

2. गर्भकालीन मधुमेह

गर्भावस्था में गर्भवती को मधुमेह का जोखिम भी हो सकता है (7)। ऐसे में इसके जोखिम को कम करने के लिए रसभरी उपयोगी हो सकती है। गर्भावस्था में रसभरी की पत्तियों से बनी हर्बल चाय का सेवन बेहद आम है। लाल रसभरी की पत्तियों से बनी चाय जेस्टेशनल डायबिटीज को नियंत्रित कर सकती है। शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि रसभरी के सेवन से ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित हो सकता है। इसके अलावा रसभरी चाय के सेवन से लेबर को उत्तेजित किया जा सकता है (4)। ये सभी गुण इस बात की पुष्टि करते हैं कि गर्भावस्था के दौरान रसभरी चाय पीना लाभकारी हो सकता है।

3. पेट की समस्या में राहत

प्रेगनेंसी में पेट से जुड़ी समस्या को कम करने में भी चाय का सेवन उपयोगी हो सकता है। इसके लिए पेपरमिंट या पुदीने की चाय का सेवन किया जा सकता है। पुदीना पेट फूलने की समस्या कम करने और स्तनों में दूध के निर्माण को बढ़ावा देने में फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके साथ ही इसमें एंटीस्पास्मोडिक (Antispasmodic) गुण होता है, जो पेट में ऐंठन की परेशानी को कम कर सकता है। वहीं, इसका सीडेटिव (Sedative) गुण श्वसन तंत्र और मूत्र पथ के संक्रमण के उपचार में भी प्रभावकारी हो सकता है (4)। साथ ही पुदीना गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी की शिकायत को कम करने में भी उपयोगी हो सकता है (8)।

4. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं में चाय पीने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान लगभग 40 से 85 फीसदी महिलाओं में गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (पेट में बनने वाला एसिड जब भोजन नली में आ जाए) के लक्षण देखे जा सकते हैं। इसकी समस्या आमतौर पर पहली तिमाही के अंत में शुरू हो सकती है, जो पूरी गर्भावस्था के दौरान बनी रह सकती है (9)। वहीं, इस समस्या से राहत पाने के लिए गर्भवती महिलाएं कैमोमाइल चाय का सेवन कर सकती हैं। कैमोमाइल चाय का उपयोग करने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से जुड़ी समस्याओं के साथ ही अनिद्रा और जोड़ों की परेशानी भी दूर हो सकती है। हालांकि, इसका सेवन हर रोज या नियमित तौर पर न करें, क्योंकि इससे समय पूर्व प्रसव और गर्भपात का जोखिम भी हो सकता है। ऐसे में बेहतर है इसके सेवन से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह भी ली जाए (4)।

5. उच्च रक्तचाप को नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की समस्या आम हो सकती है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए जटिलताएं उत्पन्न कर सकती है (10)। इससे बचाव करने के लिए महिलाएं ग्रीन टी का सेवन कर सकती हैं। दरअसल, ग्रीन टी में पॉलीफेनोल्स (Polyphenols) होते हैं, जो रक्तचाप के स्तर को कम करने में भी प्रभावी हो सकते हैं (11)। इसके अलावा, अन्य चाय की तुलना में ग्रीन टी में कैटेचिन का स्तर अधिक और कैफीन का स्तर कम होता है (12)। वहीं, लेख में यह पहले ही बता चुके हैं कि गर्भावस्था में कैफीन की कम मात्रा सुरक्षित हो सकती है (3)। इस वजह से ग्रीन टी का सीमित मात्रा में उपयोग करना गर्भावस्था के लिए सुरक्षित और फायदेमंद दोनों ही माना जा सकता है।

6. फोलिक एसिड की पूर्ति

गर्भावस्था में फोलिक एसिड जरूरी पोषक तत्वों में से एक होता है। यह न सिर्फ गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास में मदद करता है, बल्कि बच्चे को जन्मजात दोष (जैसे :- दिमाग और रीढ़ से संबंधित विकार) से बचाने में भी मदद कर सकता है (13)। वहीं, इसकी पूर्ति करने के लिए गर्भवती महिलाएं केले की चाय का सेवन कर सकती हैं। दरअसल, केले में फोलिक एसिड मौजूद होता है। वहीं, फोलिक एसिड चयापचय कार्यों (Metabolic Functions) को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है (14)। इस आधार पर कह सकते हैं कि गर्भावस्था में फोलिक एसिड की पूर्ति के लिए अन्य फोलिक एसिड युक्त खाद्य पदार्थों के साथ केले की चाय का सेवन भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि केले की चाय का सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह भी जरूर लें।

यह भी पढ़ें

अब हम प्रेगनेंसी में चाय पीने की मात्रा बता रहे हैं।

गर्भावस्था में कितनी चाय पीनी चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान, प्रतिदिन 200 मिलीग्राम से कम मात्रा में कैफीन का सेवन किया जा सकता है (15)। वहीं, लेख की शुरुआत में ही हमने जानकारी दी है कि गर्भावस्था में दिनभर में एक से दो कप तक चाय का सेवन किया जा सकता है (3)। हालांकि, गर्भवती महिलाएंं अपनी स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था के चरण के अनुसार इस बारे में डॉक्टरी सलाह भी ले सकती हैं।

अंत तक पढ़ें

चलिए, अब अंत में प्रेगनेंसी में चाय पीने के नुकसान जानते हैं।

प्रेगनेंसी में चाय पीने के नुकसान- Side Effects of Tea While Pregnant In Hindi

अगर अधिक मात्रा में प्रेगनेंसी में चाय का सेवन किया जाए, तो इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जिनके बारे में हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं।

  • पहली तिमाही में अदरक की चाय का सेवन करने से दवा के साथ प्रतिक्रिया का जोखिम हो सकता है। साथ ही यह मुंह सूखने, निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और दूसरे व तीसरे तिमाही में रक्तस्राव या स्पॉटिंग का कारण भी बन सकता है (4)।
  • ऐसी महिलाएं जो गर्भावस्था के दौरान इंसुलिन का उपयोग करती हैं, उन्हें रसभरी की पत्तियों से बनी चाय से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह गर्भावस्था में हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia-लो ब्लड शुगर का स्तर) का जोखिम बढ़ा सकता है (4)।
  • वहीं, अधिक मात्रा में कैमोमाइल चाय पीने से समय से पहले बच्चे के जन्म होने का जोखिम हो सकता है (4)।
  • इसके अलावा, अगर ग्रीन टी का अधिक सेवन किया जाए, तो इसमें मौजूद कैफीन की मात्रा गर्भावस्था में फोलिक एसिड की कमी का कारण बन सकता है, जो जन्म दोषों का जोखिम बढ़ा सकता है।
  • कुछ लोगों को केले से एलर्जी की समस्या हो सकती है (16)। ऐसी गर्भवती महिलाओं को केले से बनी चाय का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।
  • जैसा कि लेख में बता चुके हैं कि चाय में कैफीन की मात्रा होती है, ऐसे में गर्भावस्था के दौरान चाय के रूप में अधिक कैफीन का सेवन करना न सिर्फ गर्भपात का जोखिम बढ़ा सकता है, बल्कि यह जन्म के समय शिशु के कम वजन का कारण भी बन सकता है (17) (18)।

उम्मीद करते हैं कि इस लेख के जरिए आपको प्रेगनेंसी में चाय पीने के फायदे से जुड़ी जानकारी विस्तार से मिली होगी। अगर सीमित मात्रा में चाय का सेवन किया जाए तो ये लाभकारी हो सकती है। हालांकि, इसका ध्यान रखें कि अगर गर्भावस्था के दौरान गर्भवती किसी दवा का सेवन करती है, तो उसके साथ हर्बल चाय का सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। साथ ही अगर प्रेगनेंसी में चाय पीने के बाद किसी तरह के शारीरिक लक्षण नजर आते हैं, तो जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से परामर्श करें। इस लेख को अन्य लोगों के साथ शेयर कर हर किसी को गर्भावस्था में चाय पीने से जुड़ी जानकारियों से अवगत कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गर्भावस्था में चाय या कॉफी पीना अच्छा है?

अगर सीमित मात्रा में चाय या कॉफी का सेवन किया जाए, तो यह गर्भावस्था में लाभकारी हो सकता है (3)। हालांकि, चाय और कॉफी में कैफीन की मात्रा होती है, जिस वजह से अधिक मात्रा में इसका सेवन कुछ मामलों में जोखिम भरा हो सकता है (19)।

क्या गर्भावस्था में ग्रीन टी सुरक्षित है?

हां, गर्भावस्था में ग्रीन-टी पीना सुरक्षित हो सकता है, लेकिन इसका ज्यादा सेवन करना दुष्प्रभाव का कारण भी बन सकता है। इसलिए गर्भवती को इसका सेवन एक सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

क्या गर्भावस्था के दौरान दूध की चाय पी सकते हैं?

जानकारों की मानें, तो दिन में एक से दो कप दूध की चाय पी सकते हैं। हालांकि, अधिक मात्रा में इसका सेवन करना नुकसान का कारण भी बन सकता है, क्योंकि दूध से बनी चाय में भी कैफीन की मात्रा होती है (3)। इसलिए, दूध की चाय के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

References

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  3. Caffeine in the diet,
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Puja Kumari
Puja Kumariहेल्थ एंड वेलनेस राइटर
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