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क्या आपकी भी तोंद निकल आई है? क्या पेट के बल झुकने में तकलीफ होती है? क्या चलते हुए या सीढ़ियां चढ़ते हुए आपकी भी सांस फूल जाती है? अगर ऐसा है, तो आप अधिक वजन या फिर कहें मोटापे की गिरफ्त में आ चुके हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मोटापा कई शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए इसे नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम कुछ कारगर पेट कम करने के लिए योगासन बता रहे हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं। पेट की चर्बी कम करने के लिए योगासन जानने के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
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सबसे पहले जानिए पेट की चर्बी कम करने का योगासन किस प्रकार फायदेमंद हो सकता है।
पेट कम करने के लिए योगासन – Best Yoga Asanas to Reduce Belly Fat in Hindi
मोटापे से ग्रस्त इंसान डायबिटीज, हृदय रोग, स्ट्रोक, आर्थराइटिस, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकता है (1)। वहीं, एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार पेट की चर्बी कम करने के योगासन का नियमित अभ्यास फायदेमंद हो सकता है।
यह न सिर्फ मोटापा कम कर सकता है, बल्कि इससे होने वाली बीमारियों और शारीरिक समस्याओं के जोखिम को कम करने में भी सहायक हो सकता है (2) (3)। नीचे क्रमवार जानिए पेट की चर्बी कम करने के लिए योगासन और उन्हें करने की विधि।
1. ताड़ासन
पेट की चर्बी कम करने के योगासन के रूप में ताड़ासन का अभ्यास करना एक बेहतरीन शुरुआत हो सकती है। इसे करने से पूरे शरीर में खिंचाव महसूस हो सकता है। साथ ही रक्त का प्रवाह बेहतर हो सकता है। वहीं, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि अन्य योगासनों के साथ ताड़ासन का अभ्यास पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद कर सकता है (3)। वहीं, मोटापा कम करने के अलावा इसे लंबाई बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है (4)।
कैसे करें :
- सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और अपनी टांगों, कमर व गर्दन को सीधा रखें।
- अब हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं और गहरी सांस भरते हुए पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें। हथेलियां आसमान की दिशा में होनी चाहिए।
- साथ ही एड़ियों को भी ऊपर उठा लें। पूरे शरीर का संतुलन पंजों पर आ जाना चाहिए।
- इस दौरान पंजों से लेकर ऊपर हाथों तक खिंचाव महसूस करें।
- कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और सामान्य गति से सांस लेते व छोड़ते रहें।
- फिर धीरे-धीरे पहली वाली स्थिति में आ जाएं।
- इस तरह के कम से कम दो-तीन चक्र एक बार में किए जा सकते हैं।
विविधता :
ताड़ासन के साथ तिर्यक ताड़ासन भी कर सकते हैं। इसमें पंजों के बल खड़ा नहीं हुआ जाता और हाथों को ऊपर करके कमर के हिस्से से सांस लेते हुए पहले दाएं और फिर बाएं झुका जाता है।
अन्य लाभ :
विशेषज्ञ के अनुसार ताड़ासन पेट कम करने वाले योगासन के रूप में तो कार्य कर ही सकता है, साथ ही इसके अन्य फायदे भी देखे जा सकते हैं, जैसे कि :
- शरीर सुडौल हो सकता है और प्राकृतिक आकार में आ सकता है।
- छह से 20 वर्ष तक के लोगों को यह आसन करना चाहिए। इससे कद बढ़ने में मदद मिल सकती है।
- यह योगासन पीठ दर्द के लिए उत्तम हो सकता है। साथ ही मांसपेशियों, पैरों व घुटनों में होने वाले दर्द से भी आराम मिल सकता है।
- एकाग्रता बढ़ाने के लिए योगासन के रूप में भी यह काम कर सकता है।
सावधानियां :
- जिनका रक्तचाप कम हो, उन्हें यह योगासन नहीं करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को इसे करने से परहेज करना चाहिए।
- अगर घुटनों में तेज दर्द हो रहा है, तो यह आसन न करें।
- जो पहली बार यह योगासन कर रहे हैं, वो पंजों के बल इसे करने से बचें। साथ ही जिन्हें हृदय संबंधी समस्या है या फिर पैरों की नसों में सूजन और चक्कर आते हैं, वो भी इसे न करें।
2. त्रिकोणासन

पेट कम करने वाले योगासन में इसे चुना जा सकता है। इस आसन को करते समय शरीर त्रिकोण जैसी मुद्रा में आ जाता है, इसलिए इसी त्रिकोणासन कहते हैं। त्रिकोण का अर्थ होता है तीन कोण वाला और आसन का अर्थ मुद्रा से होता है। कई योग पर हुए रिसर्च में पाया गया कि अन्य योगासन के साथ ही त्रिकोणासन का अभ्यास पेट की चर्बी को कम करने में मददगार हो सकता है (3)। इसके साथ ही यह आसन कमर के किनारे की चर्बी को कम करने में भी मदद कर सकता है (4)।
कैसे करें :
- आप दोनों पैरों के बीच करीब दो फुट की दूरी बनाकर खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को शरीर के साथ सीधे सटाकर रखें।
- अब अपनी बांहों को शरीर से दूर कंधे तक फैलाएं और सांस लेते हुए दाएं हाथ को ऊपर ले जाते हुए कान से सटा लें।
- इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए कमर से बाईं ओर झुकें। इस दौरान दायां हाथ कान से सटा रहना चाहिए और घुटनों को न मोड़ें।
- अब दाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाने का प्रयास करें। साथ ही बाएं हाथ से बाएं टखने को छूने का प्रयास करें।
- करीब 10-30 सेकंड इसी मुद्रा में रहें और सामान्य गति से सांस लेते रहें।
- फिर सांस लेते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
- इसी तरह से दाईं ओर भी करें।
- इस तरह के तीन से चार चक्र कर सकते हैं।
अन्य लाभ :
एक्सपर्ट की मानें, तो त्रिकोणासन के अन्य फायदे भी हो सकते हैं।
- ताड़ासन की तरह इसे भी करने से पूरे शरीर में खिंचाव महसूस हो सकता है।
- जहां एक तरफ इसे करने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है, वहीं यह फेफड़ों को स्वस्थ रखने में भी मदद कर सकता है।
- इसे करने से कमर दर्द और साइटिका जैसी समस्या में आराम मिल सकता है।
- साथ ही यह कब्ज व एसिडिटी जैसी समस्याओं के लिए बेहतरीन आसन हो सकता है।
- यह योग शरीर की मांसपेशियों को लचीला बनाने के साथ ही तनाव को भी कम कर सकता है।
सावधानियां :
- रक्तचाप अधिक या कम होने पर इस योगासन को न करें।
- जिन्हें कमर में तेज दर्द है या फिर स्लिप डिस्क की समस्या है, वो भी इसे न करें।
- सिर चकराने या फिर गर्दन और पीठ में दर्द होने पर भी इससे दूरी बनाएं।
- अगर अधिक एसिडिटी है, तो इसे न करें।
- साथ ही जिन्हें साइटिका है, वो इसे न करें।
3. पार्श्वकोणासन

पार्श्व का मतलब बगल होता है। यह योग करते समय शरीर पार्श्व की मुद्रा बनाता है, इसलिए यह पार्श्वकोणासन कहलाता है। इसे नियमित रूप से करने से कई शारीरिक समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। वहीं, एक शोध में जिक्र मिलता है कि पार्श्वकोणासन का अभ्यास कूल्हे और जांघ की चर्बी को कम करने में मदद कर सकता है (4)। इससे हम यह मान सकते हैं कि इसे करने से कुछ हद तक पेट की चर्बी भी कम की जा सकती है। हालांकि, यह पेट की चर्बी को कम करने में कितना कारगर होगा, इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
कैसे करें :
- सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और फिर दोनों पैरों के बीच करीब तीन से चार फुट की दूरी बना लें।
- इसके बाद दाएं पैर को 90 डिग्री के कोण में घुमाएं।
- फिर गहरी सांस भरते हुए बाहों को शरीर से दूर फैलाकर कंधे की सीध में ले आएं।
- अब सांस छोड़ते हुए दाएं घुटने को 90 डिग्री के कोण तक मोड़ते हुए दाईं ओर झुकेंगे।
- अब दाएं हाथ को दाएं पैर के पीछे जमीन पर रखने का प्रयास करें। अगर हाथ को जमीन पर रखने में परेशानी हो, तो जमीन को उंगलियों से छूने का प्रयास करें।
- वहीं, बाएं हाथ को 60 डिग्री में लाते हुए कान के पास लाने का प्रयास करें और बाएं हाथ की उंगलियों को देखने का प्रयास करें। इस दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहे।
- यथासंभव इसी स्थिति में रहे और फिर सांस लेते हुए सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
- इसके बाद बाईं तरफ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं।
अन्य लाभ :
यह योग करने से और भी फायदे हो सकते हैं :
- पाचन तंत्र को बेहतर कर एसिडिटी व कब्ज से राहत दिला सकता है।
- इससे टखने व घुटने मजबूत हो सकते हैं।
सावधानियां :
● अगर घुटनों व कमर में तेज दर्द है, तो इसे न करें।
● साइटिका से ग्रसित मरीज किसी प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसे करें।
4. पादहस्तासन

यह दो शब्दों के योग पद यानी पैर और हस्त यानी हाथों के योग से बना है। यह योग करते समय हाथों को जमीन पर पैरों के साथ सटा कर रखा जाता है, जिस कारण इसे पादहस्तासन कहा जाता है। पादहस्तासन का नियमित अभ्यास पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद कर सकता है। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में उन आसनों को शामिल किया गया है, जो पेट के मोटापे को कम करने में मदद कर सकते हैं। इन योगासनों में पादहस्तासन का नाम भी शामिल है (3)। इसलिए, पेट की चर्बी करने के लिए इस आसन का अभ्यास किया जा सकता है।
कैसे करें :
- योग मैट पर पैरों को आपस में जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को भी सीधा रखें।
- अब सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं।
- इसके बाद सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और दोनों हथेलियों को पैरों के पास जमीन के साथ सटाने की कोशिश करें।
- साथ ही अपने माथे को घुटनों के साथ लगाने का प्रयास करें।
- इस अवस्था में सांस को रोककर रखें। ध्यान रहे कि कमर से नीचे का हिस्सा मुड़ना नहीं चाहिए।
- कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहें और फिर सांस लेते हुए ऊपर उठें और हाथों को ऊपर ले जाते हुए पीछे झुकने का प्रयास करें।
- इसके बाद फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। करीब तीन से चार बार ऐसा करें।
अन्य लाभ :
इस आसन के अन्य लाभ कुछ इस प्रकार देखे जा सकते हैं :
- पीठ, कूल्हों और जांघों में खिंचाव महसूस होता है, जिस कारण ये मजबूत हो सकते हैं।
- सिरदर्द व अनिद्रा जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है और मानसिक तनाव कम करने के लिए योग के रूप में भी इसे किया जा सकता है।
- पाचन तंत्र बेहतर करने के लिए इसे कर सकते हैं, जिस कारण गैस, एसिडिटी व कब्ज जैसी समस्याएं दूर हो सकती है।
सावधानियां :
- अगर पीठ में दर्द है या चोट लगी है, तो इस आसन को न करें।
- यह करते समय अगर पीठ में दर्द होने लगे, तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
- जिन्हें हृदय संबंधी कोई समस्या, हर्निया व पेट में सूजन है, वो इसे न करें।
- गर्भावस्था में भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।
5. सूर्य नमस्कार

शरीर को चुस्त व तंदुरुस्त रखने के लिए इससे बेहतर और कोई योग नहीं हो सकता। यह ऐसा योगासन है, जिसे करते समय शरीर के सभी अंग एक साथ काम करते हैं। पेट कम करने के योगासन में इसे शामिल किया जा सकता है। इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से मोटापा कम हो सकता है और जिन्हें मोटापा नहीं है, यह आसन उनका वजन संतुलित रखने में मदद कर सकता है (5)। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि पेट कम करने में यह आसन लाभकारी हो सकता है।
कैसे करें :
- प्रणाम आसन : योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को छाती के पास नमस्कार की मुद्रा में रखें।
- हस्तउत्तानासन : अब सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाकर कान के पास सटाएं और पीछे झुकने का प्रयास करें।
- पादहस्तासन : इसके बाद सांस छोड़ते हुए पेट के बल झुकें और हथेलियों को जमीन पर सटाने की कोशिश करें। साथ ही घुटनों को बिना मोड़े माथे को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें।
- अश्व संचालनासन : फिर सांस लेते हुए दाएं पैर पर बैठ जाएं और बाएं पैर को पीछे ले जाएं। इस मुद्रा में बायां घुटना जमीन पर लगाएं।
- पर्वतासन : अब सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं और शरीर को बीच से उठाएं। इस मुद्रा में अपनी एड़ियों को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करें और बाजुओं को सीधा रखें।
- अष्टांगासन : इसके बाद सांस लेते हुए जमीन पर लेट जाएं। इस अवस्था में सिर्फ ठुड्डी, छाती और घुटने ही जमीन से स्पर्श करेंगे। पेट और कूल्हों को उठाकर रखें।
- भुजंगासन : अब बिना सांस लिए या छोड़े ही कमर से ऊपर के हिस्से को नाभी तक उठाएं। इस दौरान हथेलियां जमीन से सटी रहेंगी।
- पर्वतासन : इसके बाद सांस छोड़ते हुए फिर से शरीर को बीच से उठाएंगे और एड़ियों को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करेंगे। साथ ही बाजुओं को सीधा रखेंगे।
- अश्व संचालनासन : फिर सांस लेते हुए बाएं पैर को आगे लाकर उसके बल बैठ जाएं और दाएं पैर को सीधा रखें। दाएं घुटने को जमीन से सटाएं।
- पादहस्तासन : अब सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को भी आगे ले आएं और हथेलियों को जमीन से व माथे को घुटनों से सटाकर रखें।
- हस्तउत्तानासन : फिर सांस लेते हुए हाथों व शरीर को ऊपर उठाएं और पीछे झुकने का प्रयास करें।
- प्रणाम आसन : अंत में सीधे होते हुए नमस्कार की मुद्रा में आ जाएं।
इस प्रकार सूर्य नमस्कार का एक चक्र पूरा हो जाएगा। इस तरह के एक बार में 20-25 चक्र कर सकते हैं।
अन्य लाभ :
सूर्य नमस्कार से न सिर्फ पेट की चर्बी कम की जा सकती है, बल्कि विशेषज्ञ का मानना है कि इसके अन्य लाभ भी हो सकते हैं, जैसे कि :
- यह पाचन तंत्र में सुधार कर सकता है।
- इसे करने से शारीरिक व मानसिक तनाव कम हो सकता है।
- यह योगासन पूरे शरीर को सक्रिय कर सकता है।
- अगर समय की कमी है, तो इस अकेले योगासन को करने से एक बार में ही सभी अंगों की कसरत हो सकती है।
- शरीर के दर्द को कम करने में मदद कर सकता है।
सावधानियां :
- अगर स्लिप डिस्क है या फिर घुटनों में किसी प्रकार का दर्द या परेशानी है, तो इस योगासन को न करें।
- इसे करते समय अपनी सांसों पर पूरा ध्यान दें। गलत तरीके से सांस लेने पर फायदा होने की जगह नुकसान हो सकता है।
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