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नवजात शिशु को स्नान कराना आसान काम नहीं है, खासतौर से उनके लिए जो पहली बार माता-पिता बने हैं। कुछ शिशु स्नान का आनंद लेते हैं, लेकिन कुछ शिशु को नहलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि कुछ शिशु नहाते समय रोते क्यों हैं, तो यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि उन्हें नहलाया कैसे जा रहा है। अब आप यह जरूर जानना चाहेंगे कि नवजात शिशु को कैसे नहलाया जाए? इस काम में मॉमजंक्शन का यह लेख आपकी काफी हद तक मदद कर सकता है। यहं हम नवजात शिशु को नहलाने से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां देने का प्रयास कर रहे हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं कि नवजात शिशु को कैसे नहलाना चाहिए।

नवजात शिशु को नहलाना क्यों जरूरी है?

नवजात शिशुओं की त्वचा मुलायम और नाजुक होती है (1)। ऐसे में उन्हें नहलाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन जरूरी भी है। शिशु को नहला कर साफ कपड़े पहनाना, उसके स्वास्थ्य की ओर पहला कदम हो सकता है। नहलाने के पीछे इसके अलावा भी कारण है, जो निम्न प्रकार से हैं :

  1. बैक्टीरिया दूर करे- नवजात शिशु को नहलाने से हानिकारक बैक्टीरिया दूर हो सकते हैं (2)
  1. नया अहसास – स्नान के दौरान शिशु नए अनुभव करता है। नहाने के दौरान शिशु से बातचीत करना और लोरी गाना उसके विकास में सहायक हो सकता है (3)
  1. मधुर सबंध बनाने के लिए – जब माता-पिता बच्चे को हल्के हाथों और प्यार नहलाते हैं, तो नवजात शिशु और उनके बीच स्नेह बढ़ता है (4)
  1. तनाव से राहत – नहलाने से नवजात शिशु को तनाव से राहत मिलती है और वो आराम महसूस कर सकता है (5)
  1. नींद में सहायक – स्नान के बाद शिशु भरपूर नींद ले सकता है। शोध के अनुसार नहाने के बाद नींद की गुणवत्ता बढ़ जाती है। फिर चाहे बात बड़ों की हो या फिर किसी नवजात शिशु की (6)

शिशु को नहलाना क्यों जरूरी है, यह तो हम बता ही चुके हैं। अब आगे जानते हैं कि शिशु को कब नहलाना चाहिए।

नवजात शिशु को नहलाना कब शुरू करें? | Navjat Shishu Ko Kab Nahlaye?

एक शोध के अनुसार, अगर जन्म के 12-24 घंटे बाद शिशु को नहलाया जाए, तो यह उसके स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है (7)। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) द्वारा प्रकाशित एक शोध में भी कहा गया है कि जन्म के तुंरत बाद शिशु को नहीं नहलाना चाहिए। ऐसा करने से शिशु की स्तनपान करने की संभावना बढ़ सकती है (8)। जानकारों की मानें तो एक बार शिशु का अम्बिलिकल कॉर्ड यानी गर्भनाल सूखने और गिरने के बाद ही शिशु को नहलाना उचित होता है। इससे पहले स्पोंजिंग कराना ही बेहतर हो सकता है। शिशु को नहलाने का समय निश्चित करते समय निम्न बातों का ध्यान भी रखना जरूरी है:

  • नवजात को नहलाने के लिए ऐसे समय का चयन करें, जब आप पूरी तरह फ्री हों। यह सुनिश्चित कर लें कि आप पूरा समय बच्चे पर ध्यान केंद्रित करने में समर्थ हों।
  • अगर मौसम सर्दियों का है, तो बेहतर होगा कि जब धूप तेज हो और तापमान सामान्य हो, तभी शिशु को नहलाएं।

आइए, अब जानते हैं कि शिशुओं को कब-कब नहलाया जा सकता है।

शिशुओं को कितनी बार नहलाना चाहिए?| New Born Baby Ko Kitne Din Me Nahana Chahiye?

नवजात को रोज नहलाने की जरूरत नहीं होती है। जब तक बच्चा घुटनों पर चलना शुरू नहीं करता, तब तक वह कम गंदा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिशु को सप्ताह में सिर्फ तीन दिन नहलाना काफी है (9)। इसके अलावा, शिशु को नहलाना मौसम की स्थिति पर भी निर्भर करता है। अगर गर्मी का मौसम है तो शिशु को हर रोज नहलाया जा सकता है। वहीं, ठंड या बरसात के मौसम में हर दूसरे दिन या हफ्ते में दो से तीन दिन नहलाना उचित हो सकता है। आगे हम शिशु को नहलाने के लिए की जाने वाली तैयारी के बारे में बता रहे हैं।

नवजात शिशु को नहलाने से पहले की तैयारी

नवजात शिशु को नहलाना एक जिम्मेदारी भरा काम है। बच्चे को पानी में या उसके आसपास अकेला छोड़ना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए, बेहतर होगा कि आपने बच्चे को नहलाने से पहले पूरी तैयारी करें। इसके लिए आप निम्न बातों को ध्यान में रख सकते हैं:

  • बेबी सोप, शैम्पू, पानी और तौलिया अपने हाथ की पहुंच में लाकर रखें।
  • नाजुक अंगों की सफाई के लिए कॉटन या वाशक्लॉथ का इस्तेमाल करें।
  • डायपर और सूखे कपड़े यानी नहाने के बाद काम आने वाला सामान भी एक जगह एकत्रित कर लें।
  • बेबी का ध्यान आकर्षित करने के लिए आप टब में कुछ रंग-बिरंगे खिलौने भी रख सकते हैं।
  • अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा नहाने के बाद तुरंत दूध की मांग करेगा, तो उसकी भी तैयारी रखें।

शिशु के लिए पानी का तापमान कितना होना चाहिए, इसकी जानकारी होना भी जरूरी है। आइए, इस बारे में जानते हैं।

पानी कितना गर्म होना चाहिए?

शिशु को नहलाने से पहले पानी का तापमान जांच लें। वाटर हीटर (गीजर) का तापमान 120 डिग्री फारेनहाइट पर सेट करें। शिशु को नहलाने के लिए गुनगुना पानी ही इस्तेमाल करें। पानी का तापमान जांचने के लिए आप थर्मामीटर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं (10)। आसान शब्दों में समझा जाए तो पानी पर्याप्त गर्म होना चाहिए, न ज्यादा गर्म न ज्यादा ठंडा। शिशु को नहलाने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करना उचित है और शिशु को नहलाने से पहले इसे अपने हाथ के पीछे डालकर चेक जरूर करें ताकि पानी के तापमान का पता चल सके।

शिशु को नहलाते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। आगे हम इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

अपने नवजात शिशु को कहां नहलाएं?

नवजात शिशु को स्नान कराने का स्थान निर्धारित करते समय इन बातों का ध्यान जरूर रखें (10)

  • नहाने का स्थान निर्धारित करते समय यह जाच लें कि वहां फिसलन न हो।
  • बाथरूम अगर ज्यादा गीला हो, तो पहले उसे वाइपर से सुखा लें। ऐसा करने से आपका पैर फिसलने का डर कम हो जाएगा।
  • जरूरी नहीं कि शिशु को बाथरूम में नहलाया जाये। एक टब लेकर घर के किसी भी कमरे में शिशु को नहलाया जा सकता है।
  • इस बात का ध्यान जरूर रखें कि बाथरूम व कमरे का तापमान सामान्य हो।
  • हमेशा समतल जगह का चुनाव करें, ताकि आपको शिशु को नहलाने में सुविधा रहे।

शिशु के स्नान से संबंधित अन्य जानकारियों के लिए पढ़ते रहें यह आर्टिकल।

नवजात शिशु को कैसे नहलाएं? | Newborn Baby Ko Kaise Nahlaye

नवजात शिशुओं के अंग नाजुक होते हैं। ऊपर से साबुन और शैम्पू लगे हाथों से शिशु के फिसल जाने का डर भी रहता है। इसी डर के कारण कई माता-पिता अपने नवजात शिशु को नहलाने का काम नर्स या किसी अनुभवी व्यक्ति को सौंप देते हैं, लेकिन अगर आप चाहें तो अपने बच्चे को खुद भी सुरक्षित तरीके से नहला सकते हैं। आइए, जानते हैं कि बच्चों को सुरक्षित नहलाने के कौन-कौन से तरीके हैं-

नवजात शिशु को स्पंज बाथ

जन्म के बाद पहले एक सप्ताह में स्पंज बाथ शिशु के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें एक मुलायम व गीले स्पंज, कपड़े या फिर कॉटन से शिशु के शरीर को साफ किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान शिशु की गर्भनाल पानी के संपर्क से बच जाती है, जिससे इसके जल्दी ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है (11)

अब जानते हैं कि स्पंज बाथ कैसे दिया जाता है –

जरूरी सामान – बिछाने के लिए एक मुलायम कपड़ा, बेबी सोप, पोंछने के लिए एक मुलायम कपड़ा, सूखा तौलिया, गुनगुना पानी, डायपर, शिशु के साफ कपड़े, बेबी लोशन और पाउडर। ध्यान रहे साबुन का उपयोग शिशु के जन्म के पहले सप्ताह में बिल्कुल न करें।

  • स्टेप 1 – शिशु को किसी समतल जगह पर मुलायम कपड़ा बिछाकर लेटा दें। साथ ही किसी बर्तन में गुनगुना पानी रख लें।
  • स्टेप 2 – अब एक नरम व मुलायम कपड़े को गरम पानी में डुबो कर निचोड़ें और शिशु का चेहरा और जांघ, टांग व हाथों को पोंछें।
  • स्टेप 3 – शिशु के जननांगों, नाक, कान और आंखों को ध्यान से साफ करें।
  • स्टेप 4 – इसके बाद शिशु को साफ और सूखे तौलिये से पोछ दें। ड्राई स्किन से बचाने के लिए मुलायम हाथों से बच्चे के शरीर पर बेबी लोशन यानी मॉइस्चराइजर क्रीम भी लगा सकते हैं। इससे शिशु की त्वचा में पीएच स्तर सामान्य रहता है (12)
  • स्टेप 5 – नवजात शिशु को डायपर और स्वच्छ कपड़े पहनाकर मौसम के अनुसार तापमान सामान्य करने का प्रयत्न करें।

नवजात शिशु को टब में नहलाना

एक सप्ताह के बाद शिशु को टब में नहलाया जा सकता है। शिशु को टब में नहलाने की प्रक्रिया इस प्रकार है –

जरूरी सामान –  नहाने के लिए टब के अतिरिक्त सब कुछ स्पंज बाथ के समान ही रहेगा। गरम पानी स्पंज बाथ के मुकाबले अधिक होना चाहिये।

  • स्टेप 1 – सबसे पहले टब को दो या तीन इंच तक पानी से भर लें और शिशु के कपड़े निकालकर टब में सुविधानुसार बैठाएं। ध्यान रहे कि शिशु का सिर और चेहरा पानी से बाहर रहे, पानी का स्तर बच्चे के सीने के नीचे तक होना चाहिए।
  • स्टेप 2 – एक हाथ से शिशु के सिर को सहारा दें और दूसरे हाथ से शिशु के ऊपर पानी डालें।
  • स्टेप 3 – शिशु के शरीर पर साबुन लगाएं और वाश क्लॉथ से सिर, बगल, जांघों और कमर को साफ करें।
  • स्टेप 4 – इसके बाद शिशु को साफ पानी से नहलाएं और फिर तौलिये में लपेट लें।
  • स्टेप 5 – अब शरीर को तौलिया से अच्छी तरह सुखाने के बाद पाउडर और लोशन लगा दें।
  • स्टेप 6 – फिर डायपर और कपड़ें पहनाकर शिशु का तापमान सामान्य करने का प्रयास करें।
New Born Baby Ko Kaise Nahlaye
Image: Shutterstock

पारम्परिक स्नान

भारत के कई हिस्सों में आज भी पारम्परिक स्नान प्रचलित है। इसके अंतर्गत नवजात को मां अपने पैरों पर लेटाकर नहलाती है। नहलाने से पहले शिशु की अच्छी तरह मालिश की जाती है। अगर माँ शिशु को नहलाने में सक्षम न हो तो दाई या घर की बुजुर्ग औरतें शिशु को पारम्परिक विधि से नहलाती हैं।

जरूरी सामान – बाल्टी और मग के अतिरिक्त सब कुछ स्पंज बाथ के समान ही रहता है।

स्टेप 1 – नीचे बैठ जाएं और अपने पैरों को सामने की ओर फैला लें। शिशु के कपड़े निकालकर उसे पैरों पर लेटा लें।

स्टेप 2 – बाल्टी से मग में पानी लेकर शिशु को गीला करें।

स्टेप 3 – शिशु के शरीर पर साबुन और शैम्पू लगाएं। हाथों और पैरों को अच्छी तरह साफ करें।

स्टेप 4 – साबुन को साफ पानी डालकर धो दें और बच्चे को सूखे तौलिया में लपेट लें।

स्टेप 5 – शिशु के शरीर को अच्छी तरह सुखाकर पाउडर और लोशन आदि लगाएं।

स्टेप 6 – साफ कपड़े और डायपर पहनाकर शिशु के तापमान को सामान्य करने का प्रयास करें।

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लेख में आगे शिशु और स्नान के संबंध में कुछ अन्य काम की बातें बताई गई हैं।

शिशु के चेहरे को कब और कैसे धोना चाहिए?

शिशु को नहलाते समय सबसे पहले उसके चेहरे को धोना चाहिये। चेहरे पर अगर कोई सूखी हुई चीज चिपकी हो, तो उसे रगड़कर साफ न करें। इसके लिए गीली रुई का इस्तेमाल करें। कान और नाक साफ करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। किसी चीज जैसे उंगली या ईयरबड का प्रयोग कान और नाक के अंदर न करें। चेहरे को हमेशा सादे पानी से साफ करें।

आइए, अब जानते हैं कि शिशु को स्नान कराने के बाद क्या करना चाहिए।

शिशु को नहलाने के बाद क्या करें | स्नान के बाद अपने नवजात शिशु को सुखाने और ड्रेसिंग के लिए टिप्स

  • शिशु को हमेशा सुरक्षित स्थान पर कपड़े पहनाएं। उसे ऐसी जगह लेटाएं, जहां से वह गिर न सके।
  • शिशु को पोंछने के लिए मुलायम तौलिये का इस्तेमाल करें।
  • पोछने के दौरान शिशु की त्वचा को रगड़े नहीं, बल्कि हल्के हाथों से उसकी त्वचा को सुखाने का प्रयास करें।
  • शिशु के जननांगों के आसपास देखें कि किसी तरह कि कोई एलर्जी तो नहीं है।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना किसी एंटीफंगल या एंटीबैक्टीरियल क्रीम का प्रयोग न करें।
  • बगल, कान के पीछे और कमर के नीचे के हिस्से को सूखा लें। इन जगहों की नियमित देखभाल रखें, क्योंकि इन्हीं स्थानों पर मैल के सबसे ज्यादा एकत्रित होने का डर होता है।
  • शिशु की मुट्ठी को आराम से खोलकर साफ करें।

नवजात शिशु के स्नान के संबंध में कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है।

बच्चे को नहलाते समय इन बातों को ध्यान में रखें

  • शिशु को टब में नहलाते समय सुनिश्चित कर लें कि टब कहीं से टूटा-फूटा या नुकीला न हो।
  • टब समतल सतह पर रखा हो, ताकि नहलाते समय किसी प्रकार की दुर्घटना का डर न रहे।
  • पानी में शिशु को कभी भी अकेला न छोड़े। यह नवजात के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वहीं, एक अध्ययन में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि शिशुओं के बाथ टब में डूबने की आशंका सबसे ज्यादा होती है (13)
  • फिसलन से बचने के लिए नहाने के स्थान पर मैट बिछा लें।
  • नवजात शिशु के ऊपर सीधे पानी न डालें। उसे सीधे नल के नीचे न नहलाएं। हमेशा हाथ से या मग से पानी डालें। ऐसा करने से शिशु की नाक या मुंह में सांस के साथ पानी जाने का खतरा नहीं रहता।
  • नवजात शिशु को नहलाने का काम कभी बच्चों को न दें।
  • शिशु को नहलाते समय अगर घर की घंटी बजे या मोबाइल पर किसी का कॉल आए, तो शिशु को अपने साथ ही तौलिये में लेपटकर लेकर जाएं। उसे बाथरूम में अकेला न छोड़ें (14)
  • नहलाते समय बच्चे का पेट बिल्कुल खाली न हो और न ही ज्यादा भरा हो। भूखा बच्चा नहाते समय ज्यादा रोता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बच्चे को नहाने का आनंद लेने में कैसे मदद करें?

कुछ बच्चे नहाते समय काफी रोते हैं। इस समस्या से बचने के लिए आप कुछ टिप्स ट्राई कर सकते हैं –

  • नहलाते समय बच्चे को इतना कस कर न पकड़ें कि उसे दर्द महसूस हो।
  • बच्चे का ध्यान आकर्षित करने के लिए लोरी गाएं या उससे बात करें।
  • नहलाने का तरीका बदल कर देखें। हो सकता है आपका तरीका शिशु के लिए सुविधाजनक न हो।
  • नहलाते समय शिशु के बाथ टब में रंग बिरंगे खिलौने रखें। एक और दो महीने के शिशु चटक रंगों की ओर आकर्षित होते हैं (15)

किस प्रकार का क्लींजर या साबुन का उपयोग किया जाना चाहिए?

नवजात शिशु को स्नान कराने के लिए हमेशा माइल्ड बेबी सोप और शैम्पू इस्तेमाल करें। सोप और शैम्पू आंखों में जलन और चुभन पैदा करने वाले न हों। बेबी सोप और शैम्पू में pH वैल्यू 5.5 से 7.0 के बीच होनी चाहिए (16)। बेहतर होगा कि आप कोई भी शैम्पू या साबुन इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

नवजात शिशु को नहलाना हर माता-पिता के लिए खास पल होता है। अपने शिशु के नन्हे-नन्हे हाथ व पैरों को प्यार से सहलाते हुए आपके मन में स्नेह और ममता के भाव रहते हैं। ऐसे में किसी भी अनहोनी का डर न रहे, इसलिए हमने यह लेख आपके साथ साझा किया है। अगर आप नवजात को नहलाने से कुछ असहज या समस्या महसूस करें, तो एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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