
सिंहासन बत्तीसी की ग्यारहवीं कहानी – त्रिलोचनी पुतली की कथा
हर बार की तरह इस बार भी राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए राज दरबार पहुंचते हैं। इस बार…
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हर बार की तरह इस बार भी राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए राज दरबार पहुंचते हैं। इस बार…
पूरी कहानी पढ़ें →लगातार 27 पुतलियों से राजा विक्रमादित्य की महानता की कहानी सुनकर परेशान हो चुके राजा भोज ने एक बार फिर…
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18वीं बार फिर राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़ें। उन्होंने सोचा कि इस बार चाहे कुछ भी…
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राजा भोज दोबारा सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़े। तभी 16वीं पुतली सत्यवती सिंहासन से बाहर आई और राजा…
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सिंहासन के साफ होने के बाद राजा भोज पहले दिन ही सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक थे। जब पहले…
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जब राजाभोज एक बार फिर सिंहासन पर बैठने लगे, तो 23वीं पुतली धर्मवती वहां आ गई। उसने राजाभोज से कहा…
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राजा विक्रमादित्य के गुणों का बखान करने के लिए उनके सिंहासन से इस बार तीसरी पुतली निकलती है। वह राजाभोज…
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सिंहासन पर बैठने के लिए राजाभोज ने जैसे ही अपना कदम आगे बढ़ाया, वैसे ही 24वीं पुतली करुणावती ने उन्हें…
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