
सिंहासन बत्तीसी की 32वीं कहानी – रूपवती पुतली की कथा
सिंहासन पर बैठने के लिए हमेशा उतावले रहने वाले राजा भोज इस बार सिंहासन के लिए थोड़े से भी उत्साहित…
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सिंहासन पर बैठने के लिए हमेशा उतावले रहने वाले राजा भोज इस बार सिंहासन के लिए थोड़े से भी उत्साहित…
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राजा भोज एक बार फिर सिंहासन पर बैठने की इच्छा लेकर राजमहल पहुंचे। इस बार सिंहासन से 17वीं पुतली विद्यावती…
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एक बार मुल्ला नसीरुद्दीन मक्का और मदीना की यात्रा पर निकलते हैं। तीर्थयात्रा करते हुए जब वह मक्का पहुंचे, तो…
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एक के बाद एक करके लगभलग चौबीस पुतलियों ने राजा भोज को महाराज विक्रमादित्य की कहानी के जरिए चौबीस गुणों…
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दसवें दिन दोबारा राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए दरबार पहुंचे, तभी दसवीं पुतली प्रभावती ने सिंहासन से निकलकर…
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उन्नीसवीं पुतली की कहानी सुनने के बाद राजा भोज अगले दिन फिर से सिंहासन बत्तीसी पर बैठने आते हैं, तभी…
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हर बार की तरह इस बार भी राज भोज फिर से सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़ते हैं, लेकिन…
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पच्चीवीं पुतली के द्वारा राज भोज महाराज विक्रमादित्य के गुणों को जानकर हर्षित हुए और उस स्थान से अपने महल…
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इस बार भी राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़ते हैं और तभी इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति वहां प्रकट…
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हर बार की तरह पांचवें दिन फिर से राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुकता से आगे बढ़े। सिंहासन…
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आठवीं बार राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए राज दरबार पहुंचे। रोज-रोज पुतलियों से राजा विक्रमादित्य की महानता के…
पूरी कहानी पढ़ें →विक्रमादित्य की खूबियों के बारे में बताने के लिए इस बार बारहवीं पुतली सिंहासन से निकलती है। वह राजाभोज को…
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