
Image: ShutterStock
विषय सूची
इसमें कोई शक नहीं है कि जैसे सही डाइट सेहत के लिए जरूरी है, वैसे ही व्यायाम और योग भी आवश्यक है। ठीक ऐसे ही सेहतमंद रहने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी जरूरी है। सांस फूलने की तकलीफ से बचाव करना हो या बीमारियों को दूर रखना हो, ब्रीदिंग एक्सरसाइज के फायदे कई सारे हो सकते हैं। नियमित तौर पर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से ब्रीदिंग एक्सरसाइज के फायदे कुछ ही वक्त में महसूस किए जा सकते हैं। ऐसे में स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम न सिर्फ शरीर के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज के लाभ से जुड़ी जानकारियां साझा करेंगे, बल्कि अलग-अलग तरह के ब्रीदिंग एक्सरसाइज और उन्हें करने के तरीके भी बताएंगे। तो इनके बारे में विस्तारपूर्वक जानने के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
अंत तक पढ़ें लेख
सबसे पहले समझिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज क्या है।
ब्रीदिंग एक्सरसाइज क्या है? – What is Breathing Exercise in Hindi
ब्रीदिंग एक्सरसाइज यानी सांस लेने का व्यायाम एक प्रकार का अभ्यास है, जो ब्रीदिंग पैटर्न यानी सांस लेने के तरीके से जुड़ा है। सेहतमंद रहने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज को जीवनशैली में शामिल करना जरूरी है। खासकर, कोरोना होने पर सांस फूलने जैसी समस्या से बचने के लिए ये ब्रीदिंग एक्सरसाइज कारगर साबित हो सकती है। कुछ खास प्रकार के योग को भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज की श्रेणी में रखा गया है। ब्रीदिंग एक्सरसाइज के फायदे शारीरिक तौर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक तौर पर भी महसूस किए जा सकते हैं। दर्द कम करना हो, तनाव से बचाव करना हो या मन को शांत रखना हो, ब्रीदिंग एक्सरसाइज के लाभ महसूस किए जा सकते हैं (1)।
ब्रीदिंग एक्सरसाइज के 10 से भी ज्यादा प्रकार हैं (2)। लेख में आगे हम न सिर्फ ब्रीदिंग एक्सरसाइज के फायदे बताएंगे, बल्कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज के कुछ मुख्य प्रकार और उन्हें करने के तरीके भी साझा करेंगे।
आगे पढ़ें
अब हम लेख के इस भाग में ब्रीदिंग एक्सरसाइज के फायदे बता रहे हैं।
ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के फायदे – Benefits of Breathing Exercises In Hindi
सांसों का व्यायाम न केवल बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है, बल्कि यह हमें सतर्क, सक्रिय बनाने के साथ-साथ हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी दुरुस्त रख सकता है। ऐसे में यहां हम क्रमवार तरीके से ब्रीदिंग एक्सरसाइज के लाभ बता रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं –
- फेफड़ों के लिए : ब्रीदिंग एक्सरसाइज के फायदे की बात करें तो यह फेफड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है (3)। दरअसल, इससे फेफड़ों की कार्यप्रणाली बेहतर हो सकती है। जैसा कि हमने लेख की शुरुआत में ही जानकारी दी है कि कुछ खास तरह के योग भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज की केटेगरी में ही आते हैं, जिसमें प्राणायाम का नाम भी शामिल है। इसका अभ्यास करने से रक्त ऑक्सीजन के साथ-साथ फेफड़ों की क्षमता में भी सुधार किया जा सकता है, जिससे कई बीमारियों की रोकथाम में मदद मिली सकती है (2)।
- बेहतर ऑक्सीजन फ्लो के लिए : ब्रीदिंग एक्सरसाइज के लाभ में बेहतर ऑक्सीजन फ्लो भी शामिल है। यह वेंटिलेशन फंक्शन (Ventilatory function- फेफड़ों और वातावरण के बीच वायु का आदान-प्रदान) को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है (4)। इसकी मदद से शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह मस्तिष्क, हृदय, किडनी और शरीर के अन्य अंगों में ऑक्सीजन फ्लो को बेहतर कर सकता है (2)। तो शरीर में ऑक्सीजन लेवल को सही रखने के लिए योग या ब्रीदिंग एक्सरसाइज को जीवनशैली का हिस्सा बनाना सेहतमंद विकल्प हो सकता है।
- मानसिक स्वास्थ्य के लिए : सिर्फ फेफड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना गया है। दरअसल, पेट श्वसन यानी एब्डॉमिनल ब्रीदिंग (Abdominal breathing) की प्रक्रिया को करके तनाव या अवसाद की स्थिति से बचाव या छुटकारा पाया जा सकता है। इसका कारण यह है कि एब्डॉमिनल ब्रीदिंग करने से दिमाग और शरीर दोनों को ही रिलैक्स यानी शांत किया जा सकता है (1)।
- अच्छी सेहत के लिए : ब्रीदिंग एक्सरसाइज करके व्यक्ति खुद को कई बीमारियों से बचा भी सकता है। नियमित रूप से ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से हृदय गति में सुधार होने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है। ब्रीदिंग एक्सरसाइज के लाभ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पाचन क्रिया और नींद में भी सुधार हो सकता है (1)।
- स्वास्थ्य समस्याओं में सुधार के लिए : क्रोनिक अस्थमा (Chronic Asthma), क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD – फेफड़ों की बीमारी), गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD – एसिडिटी की समस्या), सिर और गर्दन की सर्जरी के बाद की देखभाल, आदि में भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज को लाभकारी माना गया है (2)। हालांकि, ध्यान रहे कि सर्जरी के बाद किसी भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज को करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूरी है। साथ ही मरीज को ब्रीदिंग एक्सरसाइज किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करनी चाहिए।
स्क्रॉल कर आगे पढ़ें
अब बारी है ब्रीदिंग एक्सरसाइज के प्रकारों के बारे में जानने की।
ब्रीदिंग एक्सरसाइज स्वस्थ फेफड़ों और सेहतमंद शरीर के लिए – Types of Breathing Techniques In Hindi
अब जब ब्रीदिंग एक्सरसाइज के इतने लाभ जान ही चुके हैं, तो इनके अलग-अलग प्रकार और उन्हें सही तरीके से करने की प्रक्रिया जानना भी जरूरी है। अगर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने की प्रक्रिया सही नहीं हो तो ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के नुकसान भी हो सकते हैं। ऐसे में यहां हम क्रमवार तरीके से ब्रीदिंग एक्सरसाइज के प्रकार और उसे करने के तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:
1. प्रोनल ब्रीदिंग (Pronal Breathing)
प्रोनल ब्रीदिंग को प्रोन पोजिशनिंग एक्सरसाइज के नाम से भी जाना जाता है। इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज को करने से वेंटिलेशन (फेफड़ों और वातावरण के बीच वायु का आदान-प्रदान ) में सुधार हो सकता है। साथ ही यह एल्वियोली (Alveoli- फेफड़ों में छोटी-छोटी वायु की थैलियां, जो ऑक्सीजन को ऊपर ले जाते हैं) यूनिट को खुला रखता है और सांस लेने की प्रक्रिया को आसान बना सकता है।
कोरोना के इस समय में सांस और ऑक्सीजन के स्तर में सुधार करने के लिए इस एक्सरसाइज को चिकित्सकीय रूप से बेहद लाभकारी माना गया है। यहां तक की कोरोना वायरस की बीमारी की चपेट में आने के बाद होम आइसोलेशन के दौरान इस एक्सरसाइज को करने से कोरोना रोगियों में काफी सुधार भी देखा गया है (5)। तो हाइपोक्सिमिया या (Hypoxemia – रक्त में ऑक्सीजन की कमी) या हाइपोक्सिया (Hypoxia) के जोखिम को कम करने के लिए उपयोगी हो सकता है। हम यह स्पष्ट कर दें कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज के साथ-साथ कोविड में दवाइयों का सेवन और डॉक्टर से नियमित परामर्श भी लेते रहें।
प्रोनल ब्रीदिंग करने का तरीका :
यहां हम प्रोनल ब्रीदिंग को करने के तरीके के बारे में जानकारी दे रहे हैं। यह एक्सरसाइज कुछ इस तरह से की जा सकती है:
- सबसे पहले साफ-सुथरी जगह का चुनाव करके एक मैट बिछा लें।
- अब उस मैट पर एक तकिया गले के पास, दो तकिये पेट के पास और फिर दो तकिये पैर के पास रखें।
- अब मैट पर बिछाए गए तकिये पर प्रोन पोजीशन में यानी पेट के बल लेट जाएं।
- फिर इस अवस्था में गहरी सांस भरें और दो से तीन सेकंड रुकने बाद सांस को छोड़ दें।
- इसी प्रक्रिया को कम से कम 10 से 20 बार दोहराएं।
- इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज को तीन पोस्चर में किया जाता है, पेट के बल लेटकर, दाएं और बाएं तरफ लेट कर।
- प्रोनल ब्रीदिंग एक्सरसाइज को हर रोज कम से कम एक बार जरूर करें।
सावधानी :
प्रोनल ब्रीदिंग एक्सरसाइज के दौरान कुछ सावधानियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। ये सावधानियां कुछ इस प्रकार हैं:
- गर्भवती महिलाएं इस एक्सरसाइज को करने से बचें।
- भोजन के बाद एक घंटे तक इस एक्सरसाइज को नहीं करना चाहिए।
- अगर किसी को गंभीर हृदय संबंधी समस्या है, तो उन्हें भी इस तरह के एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी जाती है।
2. 4-7-8 ब्रीदिंग (4-7-8 Breathing)

4-7-8 ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के भी कई लाभ हैं। यह व्यायाम क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Moderate chronic obstructive pulmonary disease – फेफड़ों से जुड़ी परेशानी) के रोगियों में चिंता और अवसाद को कम करने में मददगार साबित हुआ है। इसके अलावा, 4-7-8 ब्रीदिंग एक्सरसाइज को डिस्पेनिया (सांस लेने में तकलीफ होना) को कम करने के साथ-साथ फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की प्रक्रिया में भी सुधार करने के लिए कारगर माना गया है (6)।
करने का तरीका:
अब हम 4-7-8 ब्रीदिंग एक्सरसाइज को करने के तरीके के बारे में जानकारी दे रहे हैं। तो 4-7-8 ब्रीदिंग एक्सरसाइज कुछ इस प्रकार की जा सकती है:
- सबसे पहले एक शांत जगह का चुनाव करें और वहां मैट बिछाकर एक आरामदायक आसन में बैठ जाएं।
- इसके बाद नाक से सांस लेते हुए अपनी उंगलियों पर 4 गिनें। इस दौरान अपना मुंह बंद ही रखें।
- उसके बाद हाथों की ही उंगलियों पर 7 तक गिनें और सांसों को रोक कर रखें। अगर किसी को शुरुआत में 7 सेकंड के लिए अपनी सांस रोकने में मुश्किलें आ रही हो, तो अधिक तनाव न लें। धीरे-धीरे अभ्यास करने से ऐसा करना आसान हो जाएगा।
- अब, हाथों की उंगलियों पर फिर से 8 गिनें और अपने मुंह से धीरे-धीरे कर के सांस छोड़ें।
- इस प्रक्रिया को कम से कम चार बार कर सकते हैं।
सावधानी:
4-7-8 ब्रीदिंग एक्सरसाइज को करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। तो 4-7-8 ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
- जिन लोगों को हृदय संबंधी समस्या हो, उन्हें इस एक्सरसाइज को करने से बचना चाहिए।
- इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी और श्वसन की मांसपेशी में समस्या झेल रहे लोगों को भी इससे परहेज करना चाहिए।
- साथ ही कैंसर जैसे गंभीर रोग में भी इस एक्सरसाइज को नहीं करने की सलाह दी जाती है।
3. बुटेयको नोज ब्रीदिंग (Buteyko Nose Breathing)

एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर मौजूद रिसर्च से जानकारी मिलती है कि बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मददगार साबित हो सकती है (7)। इसके अलावा, यह ब्रीदिंग एक्सरसाइज दमा के मरीजों में चिंता की समस्या को कम करने में भी मदद कर सकती है (8)। यही नहीं, बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज को यूस्टेशियन ट्यूब डिसफंक्शन (Eustachian tube dysfunction – कान से जुड़ी समस्या) के इलाज में भी प्रभावी पाया गया है (9)। इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज को करने का तरीका थोड़ा-बहुत प्राणायाम से मिलता-जुलता है।
करने का तरीका:
अब हम इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज को करने से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज को कुछ इस तरह से कर सकते हैं:
- इस एक्सरसाइज को करने के लिए फर्श पर या कुर्सी पर बैठ जाएं।
- इसके बाद कोई आसान और आरामदायक मुद्रा ग्रहण कर लें।
- इस दौरान अपनी रीढ़ को सीधी रखें और श्वसन की मांसपेशियों को आराम दें।
- फिर कुछ मिनटों के लिए सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें।
- इसके बाद अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली का इस्तेमाल कर के कुछ सेकंड के लिए नाक को बंद करें।
- साथ ही इस दौरान सिर को ऊपर-नीचे हिलाएं।
- इसके बाद नाक से उंगली को हटाएं और कम से कम 10 सेकंड के लिए सामान्य रूप से सांस लें।
- इस प्रक्रिया को तीन से चार बार कर सकते हैं।
सावधानी:
बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। बुटेयको नोज ब्रीदिंग एक्सरसाइज के दौरान इन बातों का ध्यान रखना चाहिए :
- इस एक्सरसाइज के दौरान सांस लेने के लिए हमेशा नाक का ही प्रयोग करें।
- अगर इस एक्सरसाइज को करने के दौरान किसी को घबराहट, सांस लेने में तकलीफ या बेचैनी महसूस होती है, तुरंत इसका अभ्यास बंद कर दें।
4. अल्टरनेट नॉस्ट्रिल ब्रीदिंग एक्सरसाइज (Alternate nostril breathing)

इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज को अनुलोम-विलोम प्राणायाम या नाड़ी शोधन प्राणायाम के नाम से भी जाना जाता है। स्वास्थ्य के लिए यह प्राणायाम कई मायनों में लाभकारी माना जा सकता है। एक शोध के अनुसार, नाड़ी शोधन प्राणायाम स्वास्थ्य संबंधी फिटनेस जैसे- कार्डियोरेस्पिरेटरी सहनशक्ति (व्यायाम के दौरान जब हृदय, फेफड़े और मांसपेशियां एक साथ काम करते हैं), फ्लेक्सिबिलिटी यानी लचीलापन और शरीर में जमा हुए फैट के प्रतिशत में सुधार कर सकता है। इतना ही नहीं शरीर में ब्लड फ्लो और ऑक्सीजन स्तर को बेहतर करने के लिए भी यह ब्रीदिंग एक्सरसाइज उपयोगी हो सकती है (10)।
वहीं, एक अन्य अध्ययन में यह बताया गया है कि अनुलोम-विलोम प्राणायाम सिस्टोलिक रक्तचाप की समस्या को कम करने में प्रभावी साबित हो सकता है (11)। यही नहीं, अनुलोम-विलोम प्राणायाम पैरानेजल साइनस (Paranasal sinuses- नाक के आसपास की हड्डियों में कई छोटे खोखले स्थान) के वेंटिलेशन और ऑक्सीजन में वृद्धि और श्वसन प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है (12)।
करने का तरीका:
इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज या योगासन को करने का तरीका कुछ इस प्रकार है:
- इस ब्रीदिंग एक्सरसाइज को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर किसी एक आसान (जैसे- पद्मासन या सुखासन) की मुद्रा में बैठ जाएं।
- इस आसान में बैठने के दौरान कमर सीधी रखें और दोनों आंखें बंद कर लें।
- इसके बाद एक लंबी गहरी सांस लें और धी
Community Experiences
Join the conversation and become a part of our vibrant community! Share your stories, experiences, and insights to connect with like-minded individuals.