Written by , (शिक्षा- एमए इन मास कम्युनिकेशन)

स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचे रहने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन जरूरी है। ये पोषक तत्व शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाए रखने में मदद करते हैं। इनमें एक नाम बीटा कैरोटीन का भी आता है। शरीर में इसकी जरूरत से कम और ज्यादा मात्रा कई शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकती है। आइये, स्टाइलक्रेज के इस लेख में जानते हैं कि आखिर शरीर में बीटा-कैरोटीन की क्या भूमिका है। बीटा कैरोटीन की कमी के लक्षण और बीटा कैरोटीन के नुकसान क्या-क्या हैं। साथ ही लेख में बीटा कैरोटीन के स्रोत भी बताए गए हैं। पूरी जानकारी के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

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लेख में सबसे पहले बीटा कैरोटीन के विषय में जान लेते हैं।

बीटा कैरोटीन क्या है? – What is Beta Carotene in Hindi

बीटा-कैरोटीन लाल, नारंगी और पीले रंग के पिगमेंट का समूह है, जिसे कैरोटेनॉयड्स कहते हैं। बीटा-कैरोटीन फलों, सब्जियों और साबुत अनाज में पाया जाता है। इसके अलावा, इसे प्रयोगशाला में भी बनाया जा सकता है। बीटा-कैरोटीन और अन्य कैरोटीनॉयड लगभग 50% विटामिन ए प्रदान कर सकते हैं। इसका उपयोग कुछ कैंसर, हृदय रोग, मोतियाबिंद और कई अन्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, रोजाना पांच सर्विंग फल और सब्जियां खाने से 6 से 8 मिलीग्राम बीटा-कैरोटीन प्राप्त हो सकता है (1)। यह प्रो विटामिन ए का एक प्रकार भी है (2)।

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बीटा कैरोटीन को जानने के बाद यहां हम बता रहे हैं बीटा कैरोटीन की कमी के कारण।

बीटा कैरोटीन की कमी होने के कारण – Causes of Beta Carotene Deficiency in Hindi

बीटा कैरोटीन को फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों की वजह से शरीर में इसकी कमी हो सकती है। यहां हम बता रहे हैं बीटा कैरोटीन की कमी किस वजह से हो सकती है (1) :

  • अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से शरीर में बीटा-कैरोटीन का स्तर कम हो सकता है।
  • ओलेस्ट्रा (वसा का विकल्प) शरीर में बीटा-कैरोटीन को 27% तक कम कर सकता है।
  • बीटा कैरोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का कम सेवन।

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लेख में आगे हम बता रहे हैं बीटा कैरोटीन की कमी के लक्षण।

बीटा कैरोटीन की कमी के लक्षण – Symptoms of Beta Carotene Deficiency in Hindi

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि बीटा कैरोटीन, विटामिन ए का ही एक प्रकार है। इसलिए, नीचे हम विटामिन-ए की कमी के लक्षण के आधार पर बीटा कैरोटीन की कमी के लक्षण बता रहे हैं (3) (4) :

  • दांतों और हड्डियों के विकास से जुड़ी समस्या।
  • आंखों की सूजन और रूखापन होना।
  • रतौंधी होना, इसमें रात के समय देखने में परेशानी हो सकती है।
  • बार-बार संक्रमित हो जाना।
  • त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई देना।
  • अधिक चिड़चिड़ापन महसूस करना।
  • बाल झड़ना।
  • भूख में कमी।
  • त्वचा का रूखापन।

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यहां हम जानते हैं बीटा कैरोटीन के फायदे के बारे में।

बीटा कैरोटीन के फायदे – Beta Carotene Benefits In Hindi

बीटा कैरोटीन सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद हो सकता है, जिसके बारे में हम नीचे बता रहे हैं :

1. आंखों के स्वास्थ्य के लिए

आंखों को स्वस्थ रखने और आंखों से जुड़ी समस्याओं से बचाव के लिए बीटा कैरोटीन फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार बीटा कैरोटीन उम्र से संबंधित नेत्र रोग, जिनमें मोतियाबिंद की समस्या, डायबिटिक रेटिनोपैथी (मधुमेह के कारण होने वाली आंखों की समस्या), ग्लूकोमा (आंखों का विकार, जिसमें नजर कमजोर होने लगती है) और एएमडी यानी एज रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन (एक प्रकार का नेत्र रोग) शामिल हैं, में फायदेमंद माना गया है (5)।

2. कैंसर से बचाव के लिए

बीटा कैरोटीन कैंसर से बचाव में लाभदायक हो सकता है। जानवरों पर हुई एक रिसर्च के अनुसार बीटा कैरोटीन में कैंसर प्रीवेंशन प्रभाव यानी कैंसर से बचाव करने वाले प्रभाव मौजूद होते हैं। इस कारण यह कैंसर के विस्तार को रोकने में मददगार हो सकता है। शोध में आगे साफ तौर से जिक्र मिलता है कि यह कीमोप्रिवेंटिव एजेंट (कैंसर से बचाने वाला) के रूप में काम कर सकता है (6)।

वहीं, एक अन्य रिसर्च के मुताबिक बीटा कैरोटीन सप्लीमेंट की अधिक मात्रा धूम्रपान करने वाले लोगों में लंग्स यानी फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकती है (5)। इस बात का ध्यान रखें कि बीटा कैरोटीन की खुराक कैंसर का इलाज नहीं है। अगर कोई कैंसर से पीड़ित है, तो उसका डॉक्टरी इलाज कराना जरूरी है।

3. फेफड़ों के लिए

फेफड़ों की कार्यप्रणाली में सुधार के साथ ही इन्हें स्वस्थ रखने में भी बीटा कैरोटीन फायदेमंद माना गया है। इस विषय पर हुई एक रिसर्च के अनुसार बीटा कैरोटीन फेफड़ों की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दरअसल, बीटा कैरोटीन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स यानी मुक्त कणों से फेफड़ों की रक्षा कर सकते हैं। वहीं, सीमित मात्रा में लिया गया बीटा कैरोटीन का सप्लीमेंट फेफड़ों को सिगरेट के धुएं के होने वाली क्षति से बचा सकता है (7)।

4. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने का काम कर सकते हैं, जिनके कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस होता है। वहीं, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कैंसर के साथ-साथ हृदय रोग, मधुमेह, अल्जाइमर रोग (भूलने की बीमारी) व पार्किंसंस रोग (यह शरीर की मूवमेंट को प्रभावित करत है) का जोखिम बढ़ा सकता है। वहीं, एक शोध में पाया गया कि बीटा-कैरोटीन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स यानी मुक्त कणों से शरीर को बचाने का काम कर सकता है (8)।

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5. मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए

विषय से जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस संज्ञानात्मक कार्य (सोचने, समझने, याद करने व निर्णय लेने की दिमागी क्षमता) और मोटर फंक्शन (शरीर की गतिशीलता से जुड़ा) को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, इसके लिए मस्तिष्क को एंटीऑक्सीडेंट की जरूरत होती है। इसके साथ ही ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की वजह से अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी भी हो सकती है।

यहां बीटा कैरोटीन फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम कर संज्ञानात्मक कार्य में मदद कर सकता है और अल्जाइमर रोग के जोखिम को भी कम कर सकता है (9)।

6. हृदय के लिए

एक शोध के अनुसार, फ्री रेडिकल्स, एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनी पर और धमनी में फैट, कोलेस्ट्रॉल व अन्य पदार्थों का जमाव) का कारण बन सकते हैं, जिससे हृदय रोग का जोखिम खड़ा हो सकता है। वहीं, एंटीऑक्सीडेंट विटामिन जैसे बीटा-कैरोटीन का उपयोग फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम कर एथेरोस्क्लेरोसिस के विस्तार को रोकने का काम कर सकता है।

वहीं, शोध में आगे जिक्र मिलता है कि बीटा-कैरोटीन कोरोनरी हृदय रोग (सीएचडी) के जोखिम को कम कर सकता है। रिसर्च में इस बात की पुष्टि की गई है कि कोरोनरी हृदय रोग की रोकथाम के लिए एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल-सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन करना चाहिए (10)।

एक अन्य अध्ययन के अनुसार बीटा कैरोटीन धूम्रपान करने वाले लोगों में इस्केमिक हृदय रोग (आईएचडी) और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है (11)। इस्केमिक हृदय रोग (आईएचडी) सीने में दर्द या बेचैनी की एक स्थिति है, जो तब होती है जब हृदय के किसी हिस्से को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता है।

7. मधुमेह के लिए

रक्त में ग्लूकोज का बढ़ा हुआ स्तर मधुमेह की समस्या का कारण बन सकता है। इस समस्या को कम करने में बीटा कैरोटीन का सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। दरअसल, एक शोध के इस बात की पुष्टि हुई है कि बीटा कैरोटीन टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम कर सकता है। इसके पीछे बीटा कैरोटीन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं (12)।

8. त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए

त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए भी बीटा कैरोटीन के फायदे देखे गए हैं। दरअसल, इस विषय पर हुई एक रिसर्च के मुताबिक बीटा कैरोटीन एक फोटोप्रोटेक्टर के रूप में कार्य कर सकता है, जो सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों की वजह से होने वाले एरिथेमा (त्वचा पर होने वाले लाल चकत्ते) को रोकने में मददगार कर सकता है। साथ ही त्वचा को सनबर्न से बचा सकते हैं। इसके अलावा, इसका फोटोप्रोटेक्टिव प्रभाव यूवी किरणों की वजह से होने वाली ढीली त्वचा और झुर्रियों से बचाव में मदद कर सकता है (13)।

9. बालों के लिए

एलोपेसिया एरियाटा (Alopecia areata) बाल झड़ने की एक समस्या है, जो इम्यून के बालों के रोम पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के कारण हो सकती है। इस समस्या में बीटा कैरोटीन सकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है। दरअसल, रिसर्च में पाया गया कि बीटा कैरोटीन में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव एलोपेसिया एरियाटा की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है (14)। हालांकि, इस विषय पर अधिक शोध की आवश्यकता है।

इसके अलावा, एक और अन्य रिसर्च में पाया गया कि बीटा कैरोटीन में पाया जाने वाला फोटोप्रोटेक्टर प्रभाव सूर्य की हानिकारक किरणों की वजह से होने वाले हेयर डैमेज को कम करने में मददगार हो सकता है (15)।

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लेख के इस भाग में हम आपको बता रहे हैं बीटा कैरोटीन के स्रोत के बारे में।

References

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बीटा कैरोटीन को प्राकृतिक रूप से फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से प्राप्त किया जा सकता है, इसके अलावा इसे प्रयोगशाला में भी बनाया जा सकता है। यहां हम इसके प्राकृतिक स्रोतों के बारे में बता रहे हैं (5) :

  • खुबानी
  • ब्रोकली
  • खरबूजा
  • गाजर कच्ची और पकी हुई
  • गोभी
  • सलाद
  • मिर्च
  • कद्दू
  • पालक पका हुआ और कच्चा
  • शकरकंद
  • विंटर स्क्वैश, पका हुआ

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यहां हम जानेंगे बीटा कैरोटीन की खुराक के विषय में।

बीटा कैरोटीन की दैनिक खुराक – Recommended Daily Intake Of Beta Carotene

बीटा कैरोटीन के फायदे सेहत के कई प्रकार से हैं, लेकिन इसे भी सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए। यहां हम इसकी सेवन करने योग्य मात्रा के बारे में बता रहे हैं (16)।

  • जर्मनी न्यूट्रिशन सोसाइटी एक अनुसार रोजाना 2 ग्राम तक बीटा कैरोटीन को सप्लीमेंट के रूप में लिया जा सकता है।
  • वहीं, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (यूएसए) के अनुसार रोजाना 5-6 मिलीग्राम बीटा-कैरोटीन की मात्रा ली जा सकती है।

नोट : बीटा कैरोटीन की मात्रा उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए, इसे लेने के पहले इसकी सही मात्रा की जानकारी अपने डॉक्टर से जरूर लें।

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बीटा कैरोटीन को लेने से जुड़ी सावधानियां नीचे बताई गई हैं।

बीटा कैरोटीन लेते समय सावधानियां – Precautions to Take while taking Beta Carotene

बीटा कैरोटीन को लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। यहां हम आपको उन्हीं के बारे में बता रहे हैं (1) :

  • बीटा कैरोटीन को सप्लीमेंट के रूप में लेने से पहले डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए।
  • किसी भी बीमारी के इलाज में बिना डॉक्टर की सलाह के बीटा कैरोटीन नहीं लें।
  • इसे अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए, इसकी मात्रा के बारे में भी डॉक्टर से जरूर पूछें।
  • धूम्रपान करने वालों को इसके सप्लीमेंट का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान बीटा-कैरोटीन की अधिक मात्रा नहीं लेनी चाहिए। इस दौरान भी डॉक्टरी सलाह लें।
  • एंजियोप्लास्टी (धमनी से जुड़ी सर्जरी) से पहले या बाद में बीटा-कैरोटीन और अन्य एंटीऑक्सीडेंट विटामिन का उपयोग न करें।

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आर्टिकल के इस हिस्से में हम बता रहे हैं बीटा कैरोटीन के नुकसान।

बीटा कैरोटीन के साइड इफेक्ट – Beta Carotene Side Effects in Hindi

बीटा कैरोटीन सेहत के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है और अगर इसका सेवन सही मात्रा में किया जाए, तो इसके फायदे हो सकते हैं। वहीं, कुछ मामलों में नीचे बताए गए बीटा-कैरोटीन के संभावित नुकसान हो सकते हैं :

  • अगर लंबे समय तक (12 वर्षों तक) बीटा-कैरोटीन की अत्यधिक मात्रा का सेवन किया जाए, तो इससे मृत्यु का जोखिम बढ़ सकता है (1)।
  • अधिक मात्रा में लेने पर बीटा-कैरोटीन त्वचा को पीला या नारंगी कर सकता है (1)।
  • अधिक मात्रा में बीटा-कैरोटीन सप्लीमेंट लेने से पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है (1)।
  • धूम्रपान करने वाले लोगों में बीटा-कैरोटीन की खुराक से कोलन, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है (1)।

बीटा कैरोटीन से जुड़ी तमाम जानकारी के बाद अब आप अच्छी तरह बीटा कैरोटीन के फायदे जान गए होंगे। शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए लेख में बताए गए बीटा कैरोटीन से युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। वहीं, बीटा कैरोटीन की कमी के लक्षणों का भी जरूर ध्यान रखें। इसके अलावा, बीटा कैरोटीन के नुकसान से बचने के लिए बताई गई सावधानियों का पालन जरूर करें। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

बीटा कैरोटीन शरीर में किस प्रकार कार्य करता है?

बीटा कैरोटीन का उपयोग कैंसर, हृदय रोग व मोतियाबिंद के जोखिम को कम करने के साथ-साथ कई अन्य समस्याओं में लाभकारी हो सकता है, जिनके बारे में हमने ऊपर चर्चा की है (1)।

मुझे बीटा कैरोटीन कब लेना चाहिए?

बीटा कैरोटीन की कमी के लक्षण दिखने पर बीटा-कैरोटीन के सप्लीमेंट का उपयोग डॉक्टरी सलाह पर किया जा सकता है।

क्या बीटा कैरोटीन वजन कम करने में मेरी मदद कर सकता है?

हां, बीटा-कैरोटीन वसा युक्त ऊतक (adipose tissue) को नियंत्रित कर मोटापा कम करने में मददगार हो सकता है (17)।

क्या बीटा कैरोटीन को रोजाना लेना सुरक्षित है?

हां, सीमित मात्रा में इससे युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। वहीं, इसका सप्लीमेंट डॉक्टरी सलाह पर ही लें (16)।

क्या बीटा कैरोटीन त्वचा के लिए अच्छा है?

हां, बीटा कैरोटीन में फोटो प्रोटेक्शन प्रभाव होता है, जो सूर्य की हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा कर सकता है और साथ ही झुर्रियों से बचाव का काम कर सकता है (13)।

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Anuj Joshi
Anuj Joshiचीफ एडिटर
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